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Sanskrit Dhara Vahini > Pratyay > क्त्वा प्रत्यय | Ktwa pratyay in Sanskrit
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क्त्वा प्रत्यय | Ktwa pratyay in Sanskrit

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3 Min Read
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क्त्वा प्रत्यय की परिभाषा, उदाहरण

क्त्वा प्रत्यय :- हैलो दोस्तो आज हम संस्कृत के ‘क्त्वा प्रत्यय’ के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। क्त्वा प्रत्यय की परिभाषा,इसके उदाहरण आदि इस ब्लॉग पोस्ट में नीचे दिए गए हैं। क्त्वा प्रत्यय को पढ़कर नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय लिखकर अवश्य भेजनी है।

प्रत्ययस्य परिभाषा –

धातो: प्रातिपदिकस्य वा पश्चात् यस्य प्रयोग क्रियते प्रत्यय इति कथ्यते। (धातु अथवा प्रातिपदिक (शब्द) के बाद जिसका प्रयोग किया जाता है वह प्रत्यय कहा जाता है

क्त्वा प्रत्यय किसे कहते हैं?

क्त्वा प्रत्यय

क्त्वा-जहाँ दो या दो अधिक क्रियाओं का एक ही कर्त्ता होता है वहाँ ‘कर या करके’ अर्थ में धातु से क्त्वा प्रत्यय होता है। क्त्वा का त्वा शेष रहता है। ‘क्त्वा’ प्रत्यय में से प्रथम वर्ण ‘क्’ की इत्संज्ञा करने पर लोप हो जाता है तथा ‘त्वा’ शेष रहता है।  इसका प्रयोग ‘करके या कर कर’ के रूप में किया जाता है।

धातु: + प्रत्यय रुपाणिहिंदी अर्थ
पठ्+क्त्वापठित्वापढ़ करके
इष्+क्त्वा इष्ट्वाइच्छा करके
क्रुध्+क्त्वाक्रुद्धवाक्रोध करके
अस्+क्त्वा भूत्वाहोकर
चल्+क्त्वा चलित्वाचलकर के
जि+क्त्वा जित्वाजीतकर के
गै+क्त्वागीत्वागाकर के
धाव्+क्त्वा धावित्वादौड़कर के
पत्+क्त्वा पतित्वागिरकर के
ग्रह्+क्त्वा ग्रहीत्वा लेकर के
रक्ष्+क्त्वा रक्षित्वा रक्षा करके
रच्+क्त्वा रचयित्वारचना करके
वद्+क्त्वा वदित्वाबोलकर के
हस्+क्त्वा हसित्वाहसकर के
कुप्+क्त्वा कुपित्वाक्रोधकर के
अकूज्+क्त्वा कूजित्वाकूजकर के
खाद्+क्त्वा खादित्वाखाकर के
खन्+क्त्वा खनित्वाखोदकर के
चर्+क्त्वा चरित्वाचलकर के
तृ+क्त्वा तीर्त्वा तैरकर के
नम्+क्त्वा नत्वाझुककर के
नश्+क्त्वा नष्ट्वा नष्ट करके
पाल्+क्त्वा पालयित्वा पालकर के
पीड्+क्त्वा पीडयित्वादुख देकर के
भ्रम्+क्त्वा भ्रमित्वाघूमकर के
वस्+क्त्वा उषित्वारहकर के
विश्+क्त्वा विष्ट्वाघुसकर के
वृष्+क्त्वा वर्षित्वाबरस कर
खेल्+क्त्वा खेलित्वा खेलकर के
वह्+क्त्वा ऊढ्वाढोकर के
नम्+क्त्वा नत्वानमस्कार करके
श्रु+क्त्वा श्रुत्वासुनकर के
सिंच्+क्त्वा सिंचित्वासीचकर के
स्था+क्त्वा तिष्ठ्वाबैठकर के
हृ+क्त्वा हत्वामारकर के
हन्+क्त्वा हनित्वाहरण करके
गम्+क्त्वा गत्वाजाकर के
सृज्+क्त्वा सृष्ट्वारचना करके
कृ+क्त्वाकृत्वाकरके
स्मृ+क्त्वा समृत्वायादकर के
स्पृश्+क्त्वा स्पृष्ट्वाछूकर के
अर्ज्+क्त्वा अर्जित्वाकमाकर के
क्षाल्+क्त्वा क्षालयित्वा धोकर के
कृष्+क्त्वा कृष्ट्वा जोतकर के
जीव्+क्त्वा जीवित्वाजीकर के
तुल्+क्त्वा तोलयित्वातोलकर के
तृ+क्त्वा तीर्त्वातैरकर के
त्यज्+क्त्वा त्यक्त्वात्यागकर के
धृ+क्त्वा धृत्वारखकर के
पूर्+क्त्वा पूरयित्वाभरकर के

👉 इन्हें भी पढ़ें

  • प्रत्ययज्ञानम्
  • कारक प्रकरण
  • उपसर्ग प्रकरण
  • संख्याज्ञानम्
  • शब्दरुपाणि
चर् (विचरण करना) धातु के रूप – Char Ke Dhatu Roop – संस्कृत
Ktvatu pratyay In Sanskrit | क्तवतु प्रत्यय के उदाहरण
वृत् धातु के रुप संस्कृत में – Vrat Dhatu Roop In Sanskrit
भाष् [कहना] के धातु रुप || Bhash Dhatu ke Roop sanskrit main
डिजिटल इंडिया पर संस्कृत निबंध | Essay on Digital India in Sanskrit
TAGGED:Ktva pratyayahKtva pratyayah ke udaaharanamPrayayau ktvaक्त्वा प्रत्यय की परिभाषाक्त्वा प्रत्यय के उदाहरण
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