Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 6 क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् Hindi & English Translation
NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 6 क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् Hindi & English Translation सरल भाषा में दिया है। साथ ही Deepakam Class 7 Chapter 6 क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् Question Answer in Hindi के सम्पूर्ण अभ्यास प्रश्नों के उत्तर भी सरल भाषा में लिखे गए हैं। इस पाठ के प्रश्न उत्तर के लिए Class 7 Chapter 6 क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् Hindi anuvad यहां खोले।
संस्कृत श्लोक
रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः ।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥१॥
हिन्दी अनुवाद
जिन लोगों के पास सुंदर रूप है, यौवन है और उन्होंने उत्तम कुल में जन्म लिया है, लेकिन यदि ये विद्या (ज्ञान) प्राप्त नहीं करते, तो उनमें कोई वास्तविक शोभा नहीं होती। यह ठीक वैसे ही है जैसे पलाश (किंशुक) के वृक्ष-जो फूलों से भरे होने के कारण देखने में बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन उनमें कोई सुगंध नहीं होती, इसलिए लोग उनका कोई उपयोग नहीं करते। इसलिए कहा गया है कि रूप, यौवन और कुल की तुलना में विद्या ही सबसे श्रेष्ठ है।
English Translation
Even those who possess physical beauty, youth, and noble lineage lack true distinction if they do not acquire knowledge. They are akin to the Palash (Kinshuk) tree—which, though visually stunning when laden with blossoms, bears no fragrance and is therefore of no practical use to anyone. Thus, it is said that knowledge is superior to beauty, youth, and lineage.
संस्कृत श्लोक
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् ।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ॥२॥
हिन्दी अनुवाद
बुद्धिमान लोग अपना समय काव्य और शास्त्रों के अध्ययन तथा चिंतन में लगाते और उसका सदुपयोग करते हैं। इसके विपरीत, मूर्ख लोग अपना समय नशे, नींद या आपसी झगड़ों में नष्ट करते है। इसलिए हमें चाहिए कि हम नियमित रूप से अध्ययन, लेखन और ज्ञान के अभ्यास द्वारा अपने समय का सदुपयोग करें।
English Translation
Wise people make productive use of their time by studying and contemplating poetry and scriptures. In contrast, foolish people squander their time on intoxication, sleep, or petty quarrels. Therefore, we should make good use of our time through regular study, writing, and the pursuit of knowledge.
संस्कृत श्लोक
विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाव ।
खलस्य साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥३॥
हिन्दी अनुवाद
दुष्ट व्यक्ति विद्या का उपयोग विवाद और कलह करने के लिए करता है। वह धन का उपयोग अहंकार दिखाने के लिए करता है और शक्ति का उपयोग दूसरों को कष्ट पहुँचाने के लिए करता है। परंतु सज्जन व्यक्ति का स्वभाव इससे पूर्णतः विपरीत होता है। वह विद्या का उपयोग दूसरों का ज्ञान बढ़ाने के लिए करता है, धन का उपयोग दान देने के लिए करता है और अपनी शक्ति का उपयोग निर्बलों की रक्षा के लिए करता है।
English Translation
A wicked person uses knowledge to incite arguments and discord. He uses wealth to display arrogance and power to inflict suffering upon others. However, the nature of a virtuous person is the exact opposite; he uses knowledge to enlighten others, wealth for charity, and his power to protect the weak.
संस्कृत श्लोक
येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ ४॥
हिन्दी अनुवाद
वे लोग जो न तो विद्या प्राप्त करते हैं, न कठिन व्रत या तप करते हैं, न दान करते है, न सच्चा ज्ञान अर्जित करते हैं, न अच्छे आचरण वाले होते हैं, न कोई गुण उनमें होता है और न ही वे धर्म का आचरण करते हैं-ऐसे लोग इस धरती पर केवल बोझ की तरह होते हैं।
English Translation
Those who neither acquire knowledge, nor observe rigorous vows or penance, nor practice charity, nor gain true wisdom, nor possess good conduct or virtues, nor follow the path of righteousness—such people are merely a burden upon this earth.
संस्कृत श्लोक
तदा वृत्तिश्च कीर्तिश्च लक्ष्मीर्वाणी यशस्विनी ।
तत्त्वज्ञानं परा शान्तिर्यदा विद्या भवेत्तव ॥ ५ ॥
हिन्दी अनुवाद
यदि तुम विद्या (सच्चा ज्ञान) प्राप्त करते हो, तो तुम्हें आजीविका, यश, धन्, प्रभावशाली वाणी, तत्वज्ञान (सत्य का बोध) और उत्तम शांति प्रास होती है। इसलिए मनुष्य को निरंतर विद्या का अर्जन करते रहना चाहिए
English Translation
If you attain Vidya (true knowledge), you attain livelihood, fame, wealth, influential speech, philosophy (understanding of truth) and excellent peace. Therefore, man should continue to acquire knowledge
संस्कृत श्लोक
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनं
विद्या भोगकरी वशः सुखकरी विद्या गुरुग्णां गुरुः।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीन पशु:।।
हिन्दी अनुवाद
विद्या मनुष्य का सबसे श्रेष्ठ सौंदर्य है। यह अदृश्य और सुरक्षित धन होती है। विद्या आनंद देती है. यश बढ़ाती है और सच्चे मित्र की भाँति साथ देती है। यह गुरुओं की भी गुरु मानी जाती है। विदेश यात्रा में विद्या ही सबसे बड़ा सहारा होती है। विद्या को उच्चतम देवी के समान माना गया है। राजसभा में विद्वान का सम्मान होता है, धनवान का नहीं। इसलिए जो व्यक्ति विद्या से रहित है, वह पशु के समान होता है।
English Translation
Knowledge is the greatest beauty a human possesses. It is a form of wealth that is both invisible and secure. Knowledge brings joy, enhances one’s renown, and stands by one like a true friend; indeed, it is considered the teacher of teachers. During travels to foreign lands, knowledge serves as the greatest support. It is revered as the supreme deity. In a royal court, it is the learned scholar who is honored, not the wealthy person; therefore, one who lacks knowledge is akin to an animal.
संस्कृत श्लोक
शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतलङ्घनम् ।
शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ।॥७॥
हिन्दी अनुवाद
मनुष्य को सदा चलने के समय सावधान रहना चाहिए। वस्त्र की सिलाई (सीवन) भी सजगता और ध्यानपूर्वक करनी चाहिए। पर्वत पर चढ़ना क्रमबद्ध ढंग से ही करना चाहिए। विद्या और धन को निरन्तर प्रयास करके धीरे-धीरे प्राप्त करना चाहिए। इन पाँचों कार्यों चलना, सिलाई करना, पर्वत चढ़ना, विद्या और धन अर्जित करना-को धीरे-धीरे और धैर्यपूर्वक, सोपानक्रम से (एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए) करना चाहिए।
English Translation
One should always be cautious while walking. Sewing should also be done with alertness and care. Climbing a mountain should be undertaken in a systematic manner. Knowledge and wealth should be acquired gradually through continuous effort. These five activities—walking, sewing, climbing a mountain, and acquiring knowledge and wealth—should be pursued slowly, patiently, and step-by-step.
संस्कृत श्लोक
न विद्यया विना सौख्यं नराणां जायते ध्रुवम् ।
अतो धर्मार्थमोक्षेभ्यो विद्याभ्यासं समाचरेत् ॥८॥
हिन्दी अनुवाद
मनुष्यों के लिए विद्या का अर्जन (अध्ययन) अत्यन्त आवश्यक और अनिवार्य होता है। यदि मनुष्य विद्या का अभ्यास नहीं करते, तो वे स्थायी सुख को प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए धर्म की प्राप्ति के लिए, धन (अर्थ) कमाने के लिए और मोक्ष को प्राप्त करने के लिए भी विद्या का अभ्यास करना चाहिए।
English Translation
For human beings, the acquisition of knowledge (study) is absolutely essential and indispensable. If people do not pursue knowledge, they cannot attain lasting happiness. Therefore, one must pursue knowledge to attain righteousness (Dharma), earn wealth (Artha), and achieve liberation (Moksha).
संस्कृत श्लोक
ताराणां भूषणं चन्द्रः लतानां भूषणं सुमम् ।
पृथिव्याः भूषणं राजा विद्या सर्वस्य भूषणम् ॥९॥
हिन्दी अनुवाद
तार चन्द्रमा के साथ मिलकर सुशोभित होते हैं। लताएँ (बेलें) फूलों के साथ शोभायमान होती हैं। राजा अपनी नीति और शासन से पृथ्वी की शोभा बढ़ाता है। उसी प्रकार विद्या मनुष्यों की सच्ची शोभा (गरिमा, मान-सम्मान) को बढ़ाती है।
English Translation
Stars shine beautifully alongside the moon. Creepers look lovely adorned with flowers. A king enhances the splendor of the earth through his statecraft and governance. Similarly, knowledge enhances the true grace and dignity of human beings.
संस्कृत श्लोक
न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि ।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् ॥१०॥
हिन्दी अनुवाद
सामान्य धन (रुपया, सोना आदि) चोर चुरा सकते हैं। राजा भी उसे बलपूर्वक डीन सकता है। भाइयों के बीच उस धन का बंटवारा भी हो सकता है। यदि धन खर्च किया जाए तो वह घट रहा है।
English Translation
Thieves can steal ordinary wealth (such as money or gold). Even a king can forcibly take it away. That wealth can also be divided among brothers. If the wealth is spent, it diminishes.
Deepakam Class 7 Chapter 6 क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् Question Answer
प्रश्न 1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु
(क) विद्याहीनाः कीदृशाः किंशुकाः इव न शोभन्ते?
उत्तर निर्गन्धाः।
(ख) धीमतां कालः कथं गच्छति?
उत्तर काव्यशास्त्रविनोदेन।
(ग) केषां कालः निद्रया कलहेन वा गच्छति?
उत्तर मूर्खाणाम्।
(घ) खलस्य विद्या किमर्थम्?
उत्तर विवादाय।
(ङ) सज्जनस्य विद्या किमर्थम्?
उत्तर ज्ञानाय।
(च) चन्द्रः केषां भूषणम् अस्ति ?
उत्तर ताराणाम्।
(छ) सर्वधनप्रधानं किम्?
उत्तर विद्याधनम्
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प्रश्न 3. उचितान् वाक्यांशान् परस्परं संयोजयन्तु –
उत्तराणि
तदा वृत्तिश्च कीर्तिश्च – यदा विद्या भवेत्तव
खलस्य साधोर्विपरीतमेतत् – ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय
शनैर्विद्या शनैर्वित्तं – पुञ्चैतानि शनैः शनैः
विद्याहीना न शोभन्ते – निर्गन्धा इव किंशुकाः
न चोरहार्यं न च राजहार्यम् – न भातृभाज्यं न च भारकारि
विद्या राजसु पूज्यते – न हि धनम्
अतो धर्मार्थमोक्षेभ्यः – विद्याभ्यासं समाचरेत्
प्रश्न 2. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु –
(क) निर्गन्धाः किंशुकाः इव के न शोभन्ते?
उत्तर विद्याहीनाः मनुष्याः निर्गन्धाः किंशुकाः इव न शोभन्ते ।
(ख) मूर्खाणां कालः कथं गच्छति?
उत्तर मूर्खाणां कालः व्यसनेन निद्रया कलहेन वा गच्छति ।
(ग) दुर्जनः विद्यायाः धनस्य शक्तेः च उपयोगं कथं करोति ?
उत्तर दुर्जनः विद्यायाः विवादाय, धनस्य मदाय, शक्तेः च परिपीडनाय उपयोगं करोति ।
(घ) कीदृशाः मनुष्याः भुवि भारभूताः भवन्ति?
उत्तर येषां न विद्या, न तपः, न दानं, न ज्ञानं, न शीलं, न गुणः, न च धर्मः अस्ति, ते मनुष्याः मर्त्यलोके भारभूताः भवन्ति ।
(ङ) शनैः शनैः कानि साधनीयानि ?
उत्तर शनैः शनैः पन्थाः, कन्थाः, पर्वतलङ्घनं, विद्या, वित्तं च साधनीयानि ।
प्रश्न 4. उदाहरणानुसारम् अधः रेखाङ्ङ्कितानि पदानि
आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु-
(क) राजा पृथिव्याः भूषणं भवति ।
(ख) साधोः विद्या ज्ञानाय भवति ।
(ग) विद्या गुरूणां गुरुः।
(घ) ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः भवन्ति ।
(ङ) विद्याहीनाः न शोभन्ते।
(च) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम् ।
(छ) विद्या राजसु पूज्यते।
(ज) काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
उत्तरम् –
(क) राजा कस्याः भूषणं भवति ?
(ख) कस्य विद्या ज्ञानाय भवति ?
(ग) विद्या केषाम् गुरुः?
(घ) ते मर्त्यलोके भुवि कीदृशाः भवन्ति ।
(ङ) के न शोभन्ते ?
(च) सर्वस्य लोचनं किम् ?
(छ) का राजसु पूज्यते ?
(ज) केन धीमतां कालो गच्छति?
प्रश्न 5. मञ्जूषातः समुचितानि पदानि स्वीकृत्य रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –
रक्षणाय, मदाय, विवादाय, परिपीडनाय, ज्ञानाय, दानाय
उत्तराणि-सज्जनस्य
शक्तिः – रक्षणाय
विद्या – ज्ञानाय
धनम् – दानाय
दुर्ज़नस्य
शक्तिः – परिपीडनाय
विद्या – विवादाय
धनम् – मदाय
प्रश्न 6. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां विभक्तिं वचनं च लिखन्तु –
| यथा-ताराणाम् | षष्ठी विभक्तिः | बहुवचनम् । |
| (क) विद्याम् | द्वितीया विभक्तिः | एकवचनम् |
| (ख) धनस्य | षष्ठी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (ग) कलहेन | तृतीया विभक्तिः | एकवचनम् |
| (घ) नराणाम् | षष्ठी विभक्तिः | बहुवचनम् |
| (ङ) मर्त्यलोके | सप्तमी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (च) ज्ञानाय | चतुर्थी विभक्तिः | एकवचनम् |
| (छ) राजसु | सप्तमी विभक्तिः | बहुवचनम् |

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