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Reading: कथ् [कहना] के धातु रुप | Kath Dhatu ke Roop Sanskrit Mein
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Sanskrit Dhara Vahini > Sanskrit Vyakaran > कथ् [कहना] के धातु रुप | Kath Dhatu ke Roop Sanskrit Mein
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कथ् [कहना] के धातु रुप | Kath Dhatu ke Roop Sanskrit Mein

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4 Min Read
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kath Dhatu ke Roop In Sanskrit | कथ् धातु के रुप संस्कृत में | कथ् परस्मैपदी धातु रुप

आज हम इस पोस्ट में कथ् धातु के रुप कैसे लिखें। Kath Dhatu ke Roop इसे यादे कैसे करें इसके बारे जानकारी देने वाले हैं। कथ् धातु के रुप तीन लकारो में चलते हैं। कथ् धातु लट् लकार, कथ् धातु लृट लकार ,कथ् धातु लड़् लकार , कथ् धातु लोट् लकार और कथ् धातु विधिलिंग लकार के बारे में जानेंगे। Today in this post we will learn how to write the form of Katha Dhatu. Or they are going to give information about how to remember it. The forms of Katha Dhatu move in three lakaros. We will learn about Katha Dhatu Latkar, Katha Dhatu Lrit Lkar, Katha Dhatu Ladkar, Katha Dhatu Lot Lkar and Katha Dhatu Vidhilinga Lkar.

Contents
  • kath Dhatu ke Roop In Sanskrit | कथ् धातु के रुप संस्कृत में | कथ् परस्मैपदी धातु रुप
    • Kath Dhatu Roop लट् लकार-वर्तमान काल
    • लृट् लकार Kath Dhatu Roop -भविष्यत् काल
    • Kath Dhatu लङ् लकार-भूतकाल
    • Kath Roop लोट् लकार-आज्ञा काल
  • Kath Dhatu Roop विधिलिङ् लकार-‘चाहिए’ अर्थ में
Kath Dhatu ke Roop
Kath Dhatu ke Roop

यहां पढ़ें कथ् धातु रूप के पांचो लकार संस्कृत भाषा में। कथ् धातु का अर्थ होता है ‘कहना’। कथ् धातु रूप के सभी लकारों में धातु रूप नीचे दिये गये हैं।

परिभाषा-क्रिया का निर्माण जिससे होता है, उसके मूल रूप को संस्कृत में ‘धातु’ कहा जाता है। जैसे पठ् या लिख धातु है और इनसे पठति, लिखतु आदि क्रियापद बनते हैं। संस्कृत में दस लकार होते हैं।पाठ्यक्रम में पाँच लकार निर्धारित हैं, जिनका परिचय इस प्रकार है-

  1. लट् लकार-वर्तमान काल की क्रिया में लट् लकार आता है। अर्थात् जिस क्रिया से वर्तमान काल का बोध होता है, उसमें लट् लकार आता है। जैसे-छात्रः पठति, त्वं लिखसि, आवां क्रीडावः आदि।
  2. लोट् लकार-आज्ञा काल या आज्ञा देने के अर्थ में क्रिया के रूप लोट् लकार में चलते हैं। जैसे सः पठतु, त्वम्, पठ, अहं पठानि आदि।
  3. लङ् लकार-भूतकाल के लिए यह लकार आता है। इसमें धातु से पहले सर्वत्र ‘अ’ जुड़कर क्रिया-पद बनता है। जैसे-अपठत्, अपठः आदि।
  4. विधिलिङ् लकार-‘चाहिए’ अर्थ में, प्रार्थना या निवेदन करने के अर्थ में विधिलिङ् लकार प्रयुक्त होता है।
  5. लुट् लकार-भविष्यत् काल की क्रिया में लुट् लकार आता है। इसमें सेट् धातुओं में ‘स्य’ तथा अनिट् धातुओं में ‘इस्य’ लगता है। जैसे-पठिष्यति, भविष्यति, दास्यामि, वक्ष्यसि आदि।

लकार के पुरुष-प्रत्येक लकार के तीन पुरुष होते हैं-
(1) प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष,
(2) मध्यम पुरुष और
(3) उत्तम पुरुष

Kath Dhatu Roop लट् लकार-वर्तमान काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:कथयतिकथयत:कथयन्ति
मध्यम पुरुष:कथयसिकथयथ:कथयथ
उत्तम पुरुष:कथयामिकथयाव:कथयाम:

लृट् लकार Kath Dhatu Roop -भविष्यत् काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:कथयतुकथयताम्कथयन्तु
मध्यम पुरुष:कथयकथयतम्कथयत
उत्तम पुरुष:कथयानिकथयावकथयाम

Kath Dhatu लङ् लकार-भूतकाल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:अकथयथ्अकथयताम्अकथयन्
मध्यम पुरुष:अकथय:अकथयतम्अकथयत
उत्तम पुरुष:अकथयम्अकथयावअकथयाम

Kath Roop लोट् लकार-आज्ञा काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:कथयतु कथयताम्कथयन्तु
मध्यम पुरुष:कथयकथयतम्कथयत
उत्तम पुरुष:कथयानिकथयावकथयाम

Kath Dhatu Roop विधिलिङ् लकार-‘चाहिए’ अर्थ में

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:कथयेत्कथयेताम्कथयेयु:
मध्यम पुरुष:कथये:कथयेतम्कथयेत
उत्तम पुरुष:कथयेयम्कथयेवकथयेम

👉 इन्हें भी पढ़ें

  1. पठ् धातु के रुप
  2. खाद् धातु के रुप
  3. हस् धातु के रुप
  4. शक् धातु के रुप
  5. अस् धातु के रुप
  6. वद् धातु के रुप
  7. लिख् धातु के रुप
  8. शी धातु के रुप
  9. लभ् धातु के रुप
  10. रुच् धातु के रुप
  11. गम् धातु के रुप
  12. चर धातु के रुप
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