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Reading: रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप – Raksh dhatu ke Roop Sanskrit Mein
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Sanskrit Dhara Vahini > Sanskrit Vyakaran > रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप – Raksh dhatu ke Roop Sanskrit Mein
Sanskrit Vyakaran

रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप – Raksh dhatu ke Roop Sanskrit Mein

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3 Min Read
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Raksh Dhatu Roop || रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप संस्कृत में – Raksh dhatu ke Roop all Lakar

रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप संस्कृत में परस्मैपदी धातु के रुप सभी लकारो में पढ़ेंगे। यहां रुच् धातु के रुप नीचे सरल तरीके से समझाया गया है। रक्ष् रक्षा करना धातु पठ् धातु की तरह ही रुप चलते हैं।

रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप
रक्ष् [रक्षा करना] धातु रुप

परिभाषा-क्रिया का निर्माण जिससे होता है, उसके मूल रूप को संस्कृत में ‘धातु’ कहा जाता है। जैसे पठ् या लिख धातु है और इनसे पठति, लिखतु आदि क्रियापद बनते हैं। संस्कृत में दस लकार होते हैं।पाठ्यक्रम में पाँच लकार निर्धारित हैं, जिनका परिचय इस प्रकार है-

  1. लट् लकार-वर्तमान काल की क्रिया में लट् लकार आता है। अर्थात् जिस क्रिया से वर्तमान काल का बोध होता है, उसमें लट् लकार आता है। जैसे-छात्रः पठति, त्वं लिखसि, आवां क्रीडावः आदि।
  2. लोट् लकार-आज्ञा काल या आज्ञा देने के अर्थ में क्रिया के रूप लोट् लकार में चलते हैं। जैसे सः पठतु, त्वम्, पठ, अहं पठानि आदि।
  3. लङ् लकार-भूतकाल के लिए यह लकार आता है। इसमें धातु से पहले सर्वत्र ‘अ’ जुड़कर क्रिया-पद बनता है। जैसे-अपठत्, अपठः आदि।
  4. विधिलिङ् लकार-‘चाहिए’ अर्थ में, प्रार्थना या निवेदन करने के अर्थ में विधिलिङ् लकार प्रयुक्त होता है।
  5. लुट् लकार-भविष्यत् काल की क्रिया में लुट् लकार आता है। इसमें सेट् धातुओं में ‘स्य’ तथा अनिट् धातुओं में ‘इस्य’ लगता है। जैसे-पठिष्यति, भविष्यति, दास्यामि, वक्ष्यसि आदि।

लकार के पुरुष-प्रत्येक लकार के तीन पुरुष होते हैं-
(1) प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष,
(2) मध्यम पुरुष और
(3) उत्तम पुरुष

लट् लकार-वर्तमान काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:रक्षतिरक्षत:रक्षन्ति
मध्यम पुरुष:रक्षसिरक्षथ:रक्षथ
उत्तम पुरुष:रक्षामिरक्षाव:रक्षाम:

लुट् लकार-भविष्यत् काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:रक्षिष्यतिरक्षिष्यत:रक्षिष्यन्ति
मध्यम पुरुष:रक्षिष्यसिरक्षिष्यथ:रक्षिष्यथ
उत्तम पुरुष:रक्षिष्यामिरक्षिष्याव: रक्षिष्याम:

लङ् लकार-भूतकाल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:अरक्षत्अरक्षताम्अरक्षन्
मध्यम पुरुष:अरक्ष:अरक्षतम्अरक्षत
उत्तम पुरुष:अरक्षम्अरक्षावअरक्षाम

लोट् लकार-आज्ञा काल

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:रक्षतुरक्षताम्रक्षन्तु
मध्यम पुरुष:रक्षरक्षतम्रक्षत
उत्तम पुरुष:रक्षाणिरक्षावरक्षाम

विधिलिङ् लकार-‘चाहिए’ अर्थ में

पुरुष:एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथम पुरुष:रक्षेत् रक्षेताम्रक्षेयु:
मध्यम पुरुष:रक्षे:रक्षेतम्रक्षेत
उत्तम पुरुष:रक्षेयम्रक्षेवरक्षेम

👉 इन्हें भी पढ़ें

  1. पठ् धातु के रुप
  2. खाद् धातु के रुप
  3. हस् धातु के रुप
  4. शक् धातु के रुप
  5. अस् धातु के रुप
  6. वद् धातु के रुप
  7. लिख् धातु के रुप
  8. शी धातु के रुप
  9. लभ् धातु के रुप
  10. रुच् धातु के रुप
  11. गम् धातु के रुप
  12. चर धातु के रुप
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Vad dhatu roop in sanskrit, all lakar – वद् धातु रूप
TAGGED:Raksh Dhatu Roop in sanskritरक्ष् धातु के रुप संस्कृत मेंरक्ष् धातु रुप
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